छंद किसे कहते हैं | परिभाषा | भेद | प्रकार | उदाहरण सहित | Chhand In Hindi

दोस्तों कई लोग छंद के बारे में internet पर search करते हैं. और वे छंद किसे कहते हैं| इसकी परिभाषा सहित व्याख्या एवं इसके भेदों के बारे में Information के लिए खोजते हैं| तो आज का हमारा यह लेख उन सभी के लिए है. जो इस Subject टॉपिक के बारे में जानकारी हासिल करना चाहते हैं|

दोस्तों यदि आप किसी Competition एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं| तो कंपटीशन Exam की में आपको Chhand वाले Questions एग्जाम में देखने को अवश्य मिल जाते हैं||
 और आप उनका जवाब नहीं दे पाते हैं| तो आप के नंबरों में कमी हो जाती है इसलिए मेरा यह आपसे कहना है| कि यदि आप छंद को ध्यान पूर्वक पढ़ लेते हैं|| तो आप Exam में कम से कम इन प्रकार के प्रश्नों को हल अवश्य कर पाएंगे|
छंद किसे कहते हैं? इस की परिभाषा | छंद के भेद कितने प्रकार के होते हैं उदाहरण सहित - Chhand In Hindi

छंद किसे कहते हैं? परिभाषा: (Chhand In Hindi)

छंद-शब्द " चद " धातु से बना हैं| जिसका अर्थ होता हैं- खुश करना| हिंदी साहित्य के अनुसार अक्षर,  अक्षरों की संख्या,  मात्रा,  गणना,  यति,  गति से संबंधित किसी विषय पर रचना को छंद कहा जाता हैं| अर्थात् निश्चित चरण,  लय, यति,  तुक,  गण,  गति,  वर्ण,  मात्रा  से नियोजित पद्य रचना को Chhand कहते हैं|

छंद के अंगों को नीचे बताया हैं| 
  • गति
  • यति
  • तुक
  • मात्रा
  • गण

गति
        पद्य के पाठ में जो बहाव होता हैं|, उसे गति कहेंगे!

यति
       पद्य के पाठ करते समय गति को तोड़कर जो विश्राम लिया जाता हैं|, उसे यति कहेंगे!

तुक
       समान उच्चारण वाले शब्दों के प्रयोग को तुक कहा जाता हैं| | पद्य सामान्यतः तुकान्त होते हैं||




मात्रा
        वर्ण के उच्चारण में जो समय लगता हैं|  उसे मात्रा कहेंगे!

मात्रा दो प्रकार की होती हैं| 1] लघु और 2] गुरु|
        ह्रस्व उच्चारण वाले वर्णों की मात्रा लघु होती हैं| तथा दीर्घ Uccharan वाले वर्णों की मात्रा गुरु होती हैं| लघु मात्रा का मान 1 होता हैं|  और उसे| चिह्न से दर्शाया किया जाता हैं| | इसी प्रकार गुरु मात्रा का मान 2 होता हैं| और उसे ऽ चिह्न से प्रदर्शित किया जाता हैं| |

गण
       मात्राओं एवं वर्णों की संख्या तथा क्रम की सुविधा के लिये इसमें तीन वर्णों के ग्रुप को एक गण मान लिया जाता हैं| |


गणों की संख्या आठ हैं|!
यगण (|ऽऽ)
मगण (ऽऽऽ)
तगण (ऽऽ|)
रगण (ऽ|ऽ)
जगण (|ऽ|)
भगण (ऽ||)
नगण (|||)
सगण (||ऽ)|

        गणों को आसानी से याद करने के लिए एक सूत्र बनाया गया हैं|: यमाताराजभानसलगा|

 सूत्र के पहले आठ वर्णों में आठ गणों के नाम हैं|| अन्तिम दो वर्ण 'ल' और 'ग' लघु और गुरू मात्राओं के सूचक हैं|| जिस गण की मात्राओं का svarup जानना हो उसके आगे के दो अक्षरों को इस सूत्र से ले लें,  जैसे 'मगण' का svarup जानने के लिए 'मा' तथा उसके आगे के दो अक्षर- 'ता रा’ = मातारा (ऽऽऽ)|

'गण' का विचार केवल वर्ण वृत्त में होता हैं|  मात्रिक छन्द इस बंधन से मुक्त होते हैं||
य मा ता रा ज भा न स ल गा

छंद के भेद कितने प्रकार के होते हैं|!

मात्रिक छंद
जिस छंद में मात्राओं की संख्या निश्चित होती हैं|  उन्हें Matrik chhand कहा जाता हैं| | इसके अन्तर्गत  अहीर,  तोमर,  मानव,  अरिल्ल,  पद्धरि ya पद्धटिका,  चौपाई,  हरिगीतिका,  तांटक,  वीर या आल्हा,  पीयूषवर्ष,  सुमेरु,  राधिका,  रोला,  दिक्पाल,  रूपमाला,  गीतिका,  सरसी,  सार,   आते हैं||

वर्णिक छंद
वर्णों की गणना पर आधारित छंद vaarnik chaand कहलाते हैं|| इस के अन्तर्गत -  प्रमाणिका,  स्वागता,  भुजंगी,  शालिनी,  इन्द्रवज्रा,  दोधक; वंशस्थ,  भुजंगप्रयाग,  द्रुतविलम्बित,  तोटक,  वसंततिलका,  मालिनी,  पंचचामर,  चंचला,  मन्दाक्रान्ता,  शिखरिणी,  शार्दूल विक्रीडित,  स्त्रग्धरा,  सवैया,  घनाक्षरी,  रूपघनाक्षरी,  देवघनाक्षरी,  कवित्त / मनहरण

वर्णवृत
सम छंद को वृत कहते हैं| | इसमें चारों चरण समान होते हैं| और प्रत्येक चरण में आने वाले लघु गुरु मात्राओं का क्रम निश्चित रहता हैं| | जैसे - द्रुतविलंबित,  मालिनी वर्णिक मुक्तक : इसमें चारों चरण समान होते हैं| और प्रत्येक चरण में वर्णों की संख्या निश्चित होती हैं|  किन्तु वर्णों का मात्राभार निश्चित नहीं रहता हैं|  जैसे मनहर,  रूप,  कृपाण,  विजया,  देव घनाक्षरी आदि|

मुक्त छंद
भक्तिकाल तक मुक्त छंद का अस्तित्व नहीं था,  यह Aadhunik ug की देन हैं| | इसके प्रणेता सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' माने जाते हैं|| मुक्त छंद नियमबद्ध नहीं होते,  केवल स्वछंद गति और भावपूर्ण यति ही मुक्त छंद की विशेषता हैं||

मुक्त छंद का उदाहरण -
वह आतादो टूक कलेजे के करता,  पछताता पथ पर आता| पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं|| एक, चल रहा लकुटिया टेक, मुट्ठी-भर दाने को,  भूख मिटाने को, मुँह फटी-पुरानी झोली का फैलाता, दो टूक कलेजे के करता,  पछताता पथ पर आता|

छंदों के विभिन्न प्रकार या रूप
दोहा 
दोही
उल्लाला
सोरठा
रोला
चौपाई
कुण्डलिया
गीतिका (Chhand)
हरिगीतिका
छप्पय
कवित्त
सवैया
बरवै
पीयूष वर्ष
शक्ति (Chhand)
मनोरम
विजात
मधुमालती (Chhand)
सुमेरु
सगुण (Chhand)
शास्त्र
सिन्धु (Chhand in hindi)
बिहारी (छंद)
दिगपाल (छंद)
सारस (Chhand)
गीता
मुक्तामणि
गगनांगना छंद
विष्णुपद
शंकर (Chhand)
सरसी
रास (छंद)
निश्चल (Chhand)
सार (छंद)
लावणी
वीर (Chhand)
त्रिभंगी
कुण्डलिनी
वियोगिनी
प्रमाणिका
वंशस्थ
शिखरिणी
उपजाति
वसंततिलका
इन्द्रवज्रा
उपेन्द्रवज्रा
शार्दूल विक्रीडित

काव्य के अंदर छंद का महत्त्व:
छंद में स्थायित्व होता हैं| |
इस से हृदय को सौंदर्यबोध होता हैं| |
छंद के निश्चित लय पर आधारित होने के कारण वे सुगमतापूर्वक कण्ठस्थ हो जाते हैं||
यह सरस होने के कारण मन को भाते हैं||
यह मानवीय भावनाओं को झंकृत करते हैं||
हां तो दोस्तों से छंद के बारे में यह लेख जो कि मैंने आपके लिए लेकर आया था इसमें मैंने छंद किसे कहते हैं| इसके भेद कितने प्रकार के होते हैं| और सभी प्रकार की अन्य Information को भी इस लेख में मैंने शामिल किया है और आपको यह आलेख कैसा लगा इससे संबंधित एक comment अवश्य करें और साथ ही साथ नीचे एक Share बटन है जिसके द्वारा आप अपने दोस्तों को WhatsApp या Facebook या किसी अन्य social media माध्यम पर इसे शेयर कर सकते हैं| अन्य जानकारी के लिए हमारे मुख्य पृष्ठ पर जाएं या नीचे दिए गए लेख अवश्य पढ़ें!