Motivation Or Motivational Stories In Hindi Story - मोटिवेशनल & मोटिवेशनल स्टोरीज स्टोरी कहानियां

[Motivation & Motivational Story In Hindi. मोटीवेशन Stories इं हिन्दी]

In today's article, we are writing one to one good stories of Hindi short stories with Motivation & Motivational for children. These stories are not only for children but provide much inspiration as well as education in Hindi language . And are written in that attractive language too. With Motivation & Motivational, these Hindi stories will prove very suitable for teachers too. 

आज के इस लेख में हम बच्चों के लिए मोटीवेशन और मोटिवेशनल के साथ Hindi लघु कहानियां के एक से एक अच्छी कहानियों को लिख रहे हैं। ये कहानियाँ केवल बच्चों के लिए हैं, बल्कि बहुत ज्यादा प्रेरणा प्रदान के साथ साथ शिक्षा भी hindi भाषा में प्रदान करती हैं। hindi motivation & motivational short stories और उस आकर्षक भाषा में भी रचा गई हैं। Motivation और मोटिवेशनल के साथ ये Hindi Kahaniyan शिक्षकों के लिए भी बहुत ही ज्यादा  उपयुक्त सिद्ध होगी हैं।
Motivation & Motivational Story In Hindi. मोटीवेशन Stories इं हिन्दी?
"मोटीवेशन और मोटिवेशनल कहानियों या स्टोरीज के मुख्य रूप से बच्चों ही नहीं बल्कि बड़ों के लिए भी एक अच्छा मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। ज्यादा परेशानी के समय में हमेशा ही इस प्रकार की Motivation and Motivational कहानियों का पड़ना अच्छा होता है। इसलिए हमे इस लेख के अंदर बहुत सारी ऐसी ही stories मोटीवेशन और Motivational को लेकर आए हैं।"

5+ interesting short hindi stories with motivation & motivational story.

Below are very interesting stories written in hindi. We hope you will like this in hindi story short Hindi Motivation and Motivational story.


[1]
सफलता का रहस्य
[Secret of Success Motivation & Motivational Story In Hindi]
एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?

सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो और वो वहां पर मिले फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा, और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया।

लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा, लेकिन सुकरात ताकतवर था और उसे उस समय तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा, फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की, वो थी हाँफते-हाँफते तेजी से सांस लेना।

सुकरात ने पूछा:— जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?

लड़के ने उत्तर दिया को सांस लेना चाहता था

सुकरात ने कहा, यही सफलता का रहस्य है। जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे, तो वो तुम्हे मिल जाएगी, इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है।

हां तो दोस्तो, जब आप सिर्फ और सिर्फ एक चीज चाहते हैं, तो more often than not… वो चीज आपको मिल जाती है। जैसे कि कोई छोटे बच्चों को देख लीजिये, वे न तो भूतकाल में जीते हैं न भविष्य में, वे हमेशा वर्तमान में जीते है, और जब उन्हें खेलने के लिए कोई खिलौना चाहिए होता है या खाने के लिए कोई टॉफ़ी चाहिए होती है। तो उनका पूरा ध्यान, उनकी पूरी शक्ति बस उसी एक चीज को पाने में लग जाती है। इसका यह परिणाम की वे उस चीज को पा लेते हैं,


इसलिए सफलता पाने के लिए फोकस बहुत ज़रूरी है। सफलता को पाने की जो चाहता है उसमे intensity होना बहुत ज़रूरी है। और जब आप वो फोकस और वो इंटेंसिटी पा लेते हैं तो सफलता आपको मिल ही जाती है।

[2]
आप हाथी नहीं इंसान हैं !
[You humans are not elephants Motivation & Motivational Story In Hindi]
एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा एवं अचानक रुक गया उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधि हुई है उसे इस बात का बड़ा आश्चर्य हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक पतली सी रस्सी से बंधे हुए हैं। ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे।

उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं ओर ये भागने का प्रयास नही कर रहे हैं।

तब महावत ने कहा:— इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है। उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें, ये बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे इन्हे यकीन होता जाता है। कि वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते, और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है। इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते।

आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते  क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं।

इन हाथियों की तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं। कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता, और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़े जकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं।

याद रखिये असफलता जीवन का एक हिस्सा है। और निरंतर प्रयास करने से ही सफलता मिलती है। यदि आप भी ऐसे किसी बंधन में बंधें हैं, जो आपको अपने सपने सच करने से रोक रहा है तो उसे तोड़ डालिए आप हाथी नहीं इंसान हैं।

नोट: हो सकता है कि आप हमारा Motivation & Motivational Story In Hindi का यह लेख को पूरा ना पड़ पाए क्योंकि इसमें बहुत सारी स्टोरीज है इसलिए हा आपसे आग्रह करते हैं और आप इस पोस्ट कि लिंक को सेव करके भी रख सकते हैं ताकि जब आपको समय मिले तब आप ऐसी ही मोटिवेशनल की स्टोरीज को पढ ले और अपने आप को मोटिवेट कर पाए।

[3]
आज ही क्यों नहीं ?
[Why not today Motivation & Motivational Story In Hindi]
एक बार की बात है, कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर सम्मान किया करता था। गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था। सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था। अब गुरूजी कुछ चिंतित रहने लगे कि कहीं उनका यह शिष्य जीवन संग्राम में पराजित न हो जाये, आलस्य में व्यक्ति को अकर्मण्य बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है। ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम के ही फलोपभोग की कामना करता है। वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है, तो उसे कार्यान्वित नहीं कर पाता। यहाँ तक कि अपने पर्यावरण के प्रति भी सजग नहीं रहता है और न भाग्य द्वारा प्रदत्त सुअवसरों का लाभ उठाने की कला में ही प्रवीण हो पता है। उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए एक योजना बना ली।

एक दिन एक काले पत्थर का एक टुकड़ा उसके हाथ में देते हुए गुरु जी ने कहा मैं तुम्हें यह जादुई पत्थर का टुकड़ा, दो दिन के लिए दे कर, कहीं दूसरे गाँव जा रहा हूँ, जिस भी लोहे की वस्तु को तुम इससे स्पर्श करोगे, वह स्वर्ण में परिवर्तित हो जायेगी। किन्तु याद रहे कि दूसरे दिन सूर्यास्त के पश्चात मैं इसे तुमसे वापस ले लूँगा।

शिष्य इस सुअवसर को पाकर बड़ा प्रसन्न हुआ लेकिन आलसी होने के कारण उसने अपना पहला दिन यह कल्पना करते-करते बिता दिया कि जब उसके पास बहुत सारा स्वर्ण होगा तब वह कितना प्रसन्न, सुखी,समृद्ध और संतुष्ट रहेगा। इतने नौकर-चाकर होंगे कि उसे पानी पीने के लिए भी नहीं उठाना पड़ेगा। फिर दूसरे दिन जब वह प्रातःकाल जागा, उसे अच्छी तरह से स्मरण था कि आज स्वर्ण पाने का दूसरा और अंतिम दिन है। उसने मन में पक्का विचार किया कि आज वह गुरूजी द्वारा दिए गये काले पत्थर का लाभ ज़रूर उठाएगा। उसने निश्चय किया कि वो बाज़ार से लोहे के बड़े-बड़े सामान खरीद कर लायेगा और उन्हें स्वर्ण में परिवर्तित कर देगा। दिन बीतता गया, पर वह इसी सोच में बैठा रहा की अभी तो बहुत समय है, कभी भी बाज़ार जाकर सामान लेता आएगा।

उसने सोचा कि अब तो दोपहर का भोजन करने के पश्चात ही सामान लेने निकलूंगा. पर भोजन करने के बाद उसे विश्राम करने की आदत थी, और उसने बजाये उठ के मेहनत करने के थोड़ी देर आराम करना उचित समझा, पर आलस्य से परिपूर्ण उसका शरीर नीद की गहराइयों में खो गया, और जब वो उठा तो सूर्यास्त होने को था। अब वह जल्दी-जल्दी बाज़ार की तरफ भागने लगा, पर रास्ते में ही उसे गुरूजी मिल गए उनको देखते ही वह उनके चरणों पर गिरकर, उस जादुई पत्थर को एक दिन, और अपने पास रखने के लिए याचना करने लगा, किन्तु गुरूजी नहीं माने और उस शिष्य का धनी होने का सपना चूर-चूर हो गया। पर इस घटना की वजह से शिष्य को एक बहुत बड़ी सीख मिल गयी उसे अपने आलस्य पर पछतावा होने लगा। वह समझ गया कि आलस्य उसके जीवन के लिए एक अभिशाप है और उसने प्रण किया कि अब वो कभी भी काम से जी नहीं चुराएगा और एक कर्मठ, सजग और सक्रिय व्यक्ति बन कर दिखायेगा।
मित्रों, जीवन में हर किसी को एक से बढ़कर एक अवसर मिलते हैं। पर कई लोग इन्हें बस अपने आलस्य के कारण गवां देते हैं। इसलिए मैं यही कहना चाहता हूँ, कि यदि आप सफल, सुखी, भाग्यशाली, धनी अथवा महान बनना चाहते हैं, तो आलस्य एवं दीर्घसूत्रता को त्यागकर, अपने अंदर विवेक, कष्टसाध्य श्रम, और सतत् जागरूकता जैसे गुणों को विकसित कीजिये एवं जब कभी आपके मन में किसी आवश्यक काम को टालने का विचार आये तो स्वयं से एक प्रश्न कीजिये [आज ही क्यों नहीं]

[4]
तितली का संघर्ष
[Butterfly clash Motivation & Motivational Story In Hindi]

एक बार एक आदमी को अपने garden में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा। अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा, और एक दिन उसने notice किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है। उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा, उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है, किन्तु बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी, और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो।

इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा। उसने एक कैंची उठायी और कोकून की opening को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके, और यही हुआ। तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था, और पंख सूखे हुए थे।

वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी।

वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है। ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके।

वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है। यदि हम बिना किसी struggle के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे। बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है। इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को possible बना पायेंगे।

[5]
विजेता मेंढक
[The winning frog Motivation & Motivational Story In Hindi]
बहुत समय पहले की बात है। एक सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहते थे। सरोवर के बीचों बीच एक बहुत पुराना धातु का खम्भा भी लगा हुआ था। जिसे उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने लगवाया था। खम्भा काफी ऊँचा था। और उसकी सतह भी बिलकुल चिकनी थी।

एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया कि क्यों ना एक रेस करवाई जाए। रेस में भाग लेने वाली प्रतियोगीयों को खम्भे पर चढ़ना होगा। और जो सबसे पहले एक ऊपर पहुच जाएगा वही विजेता माना जाएगा।

रेस का दिन आ पंहुचा, चारो तरफ बहुत भीड़ थी। आस -पास के इलाकों से भी कई मेंढक इस रेस में हिस्सा लेने पहुचे माहौल में सरगर्मी थी। हर तरफ शोर ही शोर था। रेस शुरू हुई …

लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ में एकत्र हुए किसी भी मेंढक को ये यकीन नहीं हुआकि कोई भी मेंढक ऊपर तक पहुंच पायेगा…

हर तरफ यही सुनाई देता …

अरे ये बहुत कठिन है।

वो कभी भी ये रेस पूरी नहीं कर पायंगे।

सफलता का तो कोई सवाल ही नहीं, इतने चिकने खम्भे पर चढ़ा ही नहीं जा सकता।

और यही हो भी रहा था, जो भी मेंढक कोशिश करता, वो थोडा ऊपर जाकर नीचे गिर जाता,

कई मेंढक दो तीन बार गिरने के बावजूद अपने प्रयास में लगे हुए थे …

पर भीड़ तो अभी भी चिल्लाये जा रही थी ये नहीं हो सकता, असंभव, और वो उत्साहित मेंढक भी ये सुन-सुनकर हताश हो गए और अपना प्रयास छोड़ दिया।

लेकिन उन्ही मेंढकों के बीच एक छोटा सा मेंढक था। जो बार -बार गिरने पर भी उसी जोश के साथ ऊपर चढ़ने में लगा हुआ था। वो लगातार ऊपर की ओर बढ़ता रहा। और अंततः वह खम्भे के ऊपर पहुच गया और इस रेस का विजेता बना।

उसकी जीत पर सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ। सभी मेंढक उसे घेर कर खड़े हो गए और पूछने लगे, तुमने ये असंभव काम कैसे कर दिखाया। भला तुम्हे अपना लक्ष्य प्राप्त करने की शक्ति कहाँ से मिली, ज़रा हमें भी तो बताओ कि तुमने ये विजय कैसे प्राप्त की?

तभी पीछे से एक आवाज़ आई … अरे उससे क्या पूछते हो , वो तो बहरा है.

दोस्तो अक्सर हमारे अन्दर अपना लक्ष्य प्राप्त करने की काबीलियत होती है। किन्तु हम अपने चारों तरफ मौजूद नकारात्मकता की वजह से खुद को कम आंक बैठते हैं। और हमने जो बड़े-बड़े सपने देखे होते हैं। उन्हें पूरा किये बिना ही अपनी ज़िन्दगी गुजार देते हैं। आवश्यकता इस बात की है। हम हमें कमजोर बनाने वाली हर एक आवाज के प्रति बहरे, और ऐसे हर एक दृश्य के प्रति अंधे हो जाएं। और तब हमें सफलता के शिखर पर पहुँचने से कोई नहीं रोक पायेगा।
[6]
दोस्त का जवाब
[Friend answer Motivation & Motivational Story In Hindi]
बहुत समय पहले की बात है। दो दोस्त बीहड़ इलाकों से होकर शहर जा रहे थे। गर्मी बहुत अधिक होने के कारण वो बीच बीच में रुकते और आराम करते। उन्होंने अपने साथ खाने-पीने की भी कुछ चीजें रखी हुई थीं। जब दोपहर में उन्हें भूख लगी तो दोनों ने एक जगह बैठकर खाने का विचार किया।

खाना खाते खाते दोनों में किसी बात को लेकर बहस छिड गयी। और धीरे धीरे बात इतनी बढ़ गयी कि एक दोस्त ने दूसरे को थप्पड़ मार दिया। किन्तु थप्पड़ खाने के बाद भी दूसरा दोस्त चुप रहा और कोई विरोध नहीं किया ….बस उसने पेड़ की एक टहनी उठाई और उससे मिटटी पर लिख दिया आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा।

थोड़ी देर बाद उन्होंने पुनः यात्रा शुरू की, मन मुटाव होने के कारण वो बिना एक दूसरे से बात किये आगे बढ़ते जा रहे थे, कि तभी थप्पड़ खाए दोस्त के चीखने की आवाज़ आई। वह गलती से दलदल में फँस गया था …दूसरे दोस्त ने तेजी दिखाते हुए उसकी मदद की और उसे दलदल से निकाल दिया।

इस बार भी वह दोस्त कुछ नहीं बोला उसने बस एक नुकीला पत्थर उठाया और एक विशाल पेड़ के तने पर लिखने लगा "आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई"

उसे ऐसा करते देख दूसरे मित्र से रहा नहीं गया और उसने पूछा "जब मैंने तुम्हे पत्थर मारा तो तुमने मिटटी पर लिखा और जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तो तुम पेड़ के तने पर कुरेद कुरेद कर लिख रहे हो, ऐसा क्यों?"

"जब कोई तकलीफ दे तो हमें उसे अन्दर तक नहीं बैठाना चाहिए ताकि क्षमा रुपी हवाएं इस मिटटी की तरह ही उस तकलीफ को हमारे जेहन से बहा ले जाएं, लेकिन जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करे, तो उसे इतनी गहराई से अपने मन में बसा लेने चाहिए कि वो कभी हमारे जेहन से मिट ना सके," दोस्त का जवाब आया।
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बाज की उड़ान
[Eagle flight Motivation & Motivational Story In Hindi]

एक बार की बात है, कि एक बाज का अंडा मुर्गी के अण्डों के बीच आ गया। कुछ दिनों बाद उन अण्डों में से चूजे निकले, बाज का बच्चा भी उनमे से एक था। वो उन्ही के बीच बड़ा होने लगा। वो वही करता जो बाकी चूजे करते, मिटटी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्हीकी तरह चूँ-चूँ करता। बाकी चूजों की तरह वो भी बस थोडा सा ही ऊपर उड़ पाता, और पंख फड़-फडाते हुए नीचे आ जाता। फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा। बाज बड़े शान से बेधड़क उड़ रहा था| तब उसने बाकी चूजों से पूछा, कि- "इतनी उचाई पर उड़ने वाला वो शानदार पक्षी कौन है?"

तब चूजों ने कहा- "अरे वो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही ताकतवर और विशाल है। किन्तु तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम तो एक चूजे हो"

बाज के बच्चे ने इसे सच मान लिया और कभी वैसा बनने की कोशिश नहीं की, वो ज़िन्दगी भर चूजों की तरह रहा, और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया।

हां तो दोस्तों, हममें से बहुत से लोग उस बाज की तरह ही अपना असली potential जाने बिना एक second-class ज़िन्दगी जीते रहते हैं। हमारे आस-पास की mediocrity हमें भी mediocre बना देती है।   हम में ये भूल जाते हैं कि हम आपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी हैं| हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं है, किन्तु फिर भी बस एक औसत जीवन जी के हम इतने बड़े मौके को गँवा देते हैं।

आप चूजों की तरह मत बनिए, अपने आप पर, अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिए। आप चाहे जहाँ हों, जिस परिवेश में हों, अपनी क्षमताओं को पहचानिए और आकाश की ऊँचाइयों पर उड़ कर दिखाइए, क्योंकि यही आपकी वास्तविकता है।
[8]
चिल्लाओ मत!
[Do not shout! Motivation & Motivational Story In Hindi]

एक हिन्दू सन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा। वहां एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते करते एक दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर जोर से चिल्लाने लगे।

संयासी यह देख तुरंत पलटा और अपने शिष्यों से पुछा

"क्रोध में लोग एक दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं ?"

शिष्य कुछ देर सोचते रहे ,एक ने उत्तर दिया, " क्योंकि हम क्रोध में शांति खो देते हैं इसलिए"

किन्तु जब दूसरा व्यक्ति हमारे सामने ही खड़ा है तो भला उस पर चिल्लाने की क्या ज़रुरत है , जो कहना है वो आप धीमी आवाज़ में भी तो कह सकते हैं, सन्यासी ने पुनः प्रश्न किया।

कुछ और शिष्यों ने भी उत्तर देने का प्रयास किया पर बाकी लोग संतुष्ट नहीं हुए।

अंततः सन्यासी ने समझाया …

“जब दो लोग आपस में नाराज होते हैं तो उनके दिल एक दूसरे से बहुत दूर हो जाते हैं। और इस अवस्था में वे एक दूसरे को बिना चिल्लाये नहीं सुन सकते …. वे जितना अधिक क्रोधित होंगे उनके बीच की दूरी उतनी ही अधिक हो जाएगी और उन्हें उतनी ही तेजी से चिल्लाना पड़ेगा।

क्या होता है जब दो लोग प्रेम में होते हैं? तब वे चिल्लाते नहीं बल्कि धीरे-धीरे बात करते हैं , क्योंकि उनके दिल करीब होते हैं। उनके बीच की दूरी नाम मात्र की रह जाती है।”

सन्यासी ने बोलना जारी रखा और जब वे एक दूसरे को हद से भी अधिक चाहने लगते हैं, तो क्या होता है? तब वे बोलते भी नहीं, वे सिर्फ एक दूसरे की तरफ देखते हैं और सामने वाले की बात समझ जाते हैं।

“प्रिय शिष्यों, जब तुम किसी से बात करो तो ये ध्यान रखो की तुम्हारे ह्रदय आपस में दूर न होने पाएं, तुम ऐसे शब्द मत बोलो जिससे तुम्हारे बीच की दूरी बढे नहीं तो एक समय ऐसा आएगा कि ये दूरी इतनी अधिक बढ़ जाएगी कि तुम्हे लौटने का रास्ता भी नहीं मिलेगा। इसलिए चर्चा करो, बात करो लेकिन चिल्लाओ मत।
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दर्जी की सीख
[Tailor's lesson Motivation & Motivational Story In Hindi]

बहुतएक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया ।वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा। उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं। और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं। फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सु ई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं।

जब उसने इसी क्रिया को चार-पाँच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया। तो उसने अपने पापा से कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है? पापा ने कहा:- बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो? बेटा बोला:- पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं, आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों? इसका जो उत्तर पापा ने दिया:- उन दो पंक्तियाँ में मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया।

उत्तर था- ”बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है। यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं।
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भगवान बचाएगा !
[God will save! Motivation & Motivational Story In Hindi]

एक समय की बात है किसी गाँव में एक साधु रहता था, वह भगवान का बहुत बड़ा भक्त था और निरंतर एक पेड़ के नीचे बैठ कर तपस्या किया करता था। उसका भागवान पर अटूट विश्वास था और गाँव वाले भी उसकी इज्ज़त करते थे।

एक बार गाँव में बहुत भीषण बाढ़ आ गई। चारो तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा, सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों की तरफ बढ़ने लगे। जब लोगों ने देखा कि साधु महाराज अभी भी पेड़ के नीचे बैठे भगवान का नाम जप रहे हैं। तो उन्हें यह जगह छोड़ने की सलाह दी।

किन्तु साधु ने कहा-
तुम लोग अपनी जान बचाओ मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा!

धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ता गया, और पानी साधु के कमर तक आ पहुंचा, इतने में वहां से एक नाव गुजरी।

मल्लाह ने कहा- हे साधू महाराज आप इस नाव पर सवार हो जाइए मैं आपको सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दूंगा

नहीं, मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता नहीं है , मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा !!

साधु ने उत्तर दिया
नाव वाला चुप-चाप वहां से चला गया.

कुछ देर बाद बाढ़ और प्रचंड हो गयी , साधु ने पेड़ पर चढ़ना उचित समझा और वहां बैठ कर ईश्वर को याद करने लगा। तभी अचानक उन्हें गड़गडाहत की आवाज़ सुनाई दी, एक हेलिकोप्टर उनकी मदद के लिए आ पहुंचा। बचाव दल ने एक रस्सी लटकाई और साधु को उसे जोर से पकड़ने का आग्रह किया|

पर साधु फिर बोला:— मैं इसे नहीं पकडूँगा, मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा

उनकी हठ के आगे बचाव दल भी उन्हें लिए बगैर वहां से चला गया

कुछ ही देर में पेड़ बाढ़ की धारा में बह गया और साधु की मृत्यु हो गयी

मरने के बाद साधु महाराज स्वर्ग पहुचे और भगवान से बोले - हे प्रभु मैंने तुम्हारी पूरी लगन के साथ आराधना की… तपस्या की पर जब मै पानी में डूब कर मर रहा था तब तुम मुझे बचाने नहीं आये, ऐसा क्यों प्रभु?

भगवान बोले, हे साधु महात्मा मै तुम्हारी रक्षा करने एक नहीं बल्कि तीन बार आया, पहला, ग्रामीणों के रूप में, दूसरा नाव वाले के रूप में, और तीसरा ,हेलीकाप्टर बचाव दल के रूप में. किन्तु तुम मेरे इन अवसरों को पहचान नहीं पाए।

मित्रों, इस जीवन में ईश्वर हमें कई अवसर देता है, इन अवसरों की प्रकृति कुछ ऐसी होती है कि वे किसी की प्रतीक्षा नहीं करते है, वे एक दौड़ते हुआ घोड़े के सामान होते हैं। जो हमारे सामने से तेजी से गुजरते हैं, यदि हम उन्हें पहचान कर उनका लाभ उठा लेते है तो वे हमें हमारी मंजिल तक पंहुचा देते है। अन्यथा हमें बाद में पछताना ही पड़ता है।
बच्चो व नवजवानों के लिए hindi motivational and motivation short stories का यह लेख लेकर आया जो कि आज से पहले भी कई बार अपडेट हो चुका है और आगे भी नई नई hindi motivation की short stories को  अपडेट किया जाएगा।

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