पदार्थ किसे कहते हैं – पदार्थ का वर्गीकरण | पांच अवस्था | गुण – Padarth Kise Kahate Hain

पदार्थ किसे कहते हैं? पदार्थ का वर्गीकरण बताते हुए, (Matter) की पांच अवस्था और गुण क्या है। इससे संबंधित सभी सूचना को सिर्फ एक ही लेख में समझने का प्रयास किया है जबकि यदि कोई कोई पदार्थ या द्रव्य या Matter से रिलेटेड कोई सूचना छूट जाए तो हमें कमेंट करके बताएं हम उस भी एड करने कि कोशिश करेंगे!
पदार्थ किसे कहते हैं। पदार्थ का वर्गीकरण बताते हुए (Matter) की पांच अवस्था और गुण

पदार्थ किसे कहते हैं [What Is Matter In Hindi]

  • किसे कहें: दुनिया की कोई भी वस्तु जो स्थान घेरती हैं उसका द्रव्यमान होता है एवं जो अपनी संरचना में परिवर्तन का विरोध करती हैं उसे पदार्थ कहते हैं। उदाहरण के लिए जल ,हवा ,बालू आदि।
    प्रारंभ में भारतीयों एवं यूनानी का आनुमान बताया जाता था के प्रकृति में सारी वस्तुएं पांच प्रकार के तत्वों से बनी हैं।
     भारत के महान ऋषि कनाद के अनुसार, सभी padarth अत्यंत शुक्ष्म कारण से बने है, जो परमाणु हैं।
पदार्थ का वर्गीकरण [Classification of matter in hindi]
पदार्थ का वर्गीकरण [Classification of matter in hindi]
पदार्थ का वर्गीकरण दो रूप से हैं जो कि नीचे विस्तार से आगे बताया जाएगा:
       1. भौतिक वर्गीकरण
       2. रासायनिक वर्गीकरण
1] भौतिकवर्गीकरण:— भौतिक वर्गीकरण मुख्य रूप से तीन प्रकार होता है लेकिन पदार्थ की चौथी और पांचवीं अवस्था को भी खोजा जा चुका है जो चौथी अवस्था प्लाजमा (Plasma) पांचवीं अवस्था बोस-आइंस्टीन कन्डनसेट (Bose-Einstein condensate) है।
       1. ठोस (Salid),
       2. द्रव (Liquid),
       3. गैस (Gas)
1] ठोस (Salid): पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसका आकार तथा आयतन दोनों निश्चित हो, वह ठोस है।

उदाहरण जैसे लोहे की छड़,लकड़ी की कुर्सी, बर्फ का टुकड़ा!
     यह पदार्थ की वह अवस्था है, जिसमें उसका आयतन तथा आकार दोनों निश्चित होता है| ठोस कणों के बीच लगने वाले बल इतने प्रबल होते है| कि इनके घटक कण किसी भी prakar की गति नहीं कर पाते हैं| एवं इसी कारण आकार मे निश्चित होते हैं| तथा जिस कन्टेनर मे रखे जाते हैं उसका आकार ग्रहण नहीं करते हैं|

ठोस पदार्थों का एक निश्चित त्रिविमीय क्रिस्टल जालक होता है| अतः संपीड़न करने पर इनका आयतन परिवर्तित नहीं होता है| ठोस पदार्थों में अंतराकणीय दूरी न्यूनतम होती है तथा इनकी संपीड्यता भी बहुत कम होती है।

ठोस पदार्थों का मुक्त प्रसार नहीं होता है जबकि तापीय प्रसार भी बहुत कम होता है| एवं दृढ़ होने के कारण इन में बहने का गुण नहीं पाया जाता है।

ठोस अवस्था के गुण-धर्म निन्नलिखित हैं।
   1. ये निश्चित द्रव्यमान, आयतन एवं आकार के होते हैं।
   2. ये असंपीड्य और कठोर होते हैं।
   3. इनमें अंतराआण्विक दूरियाँ लघु होती हैं। 
   4. इनमें अंतराआण्विक force प्रबल होते हैं।     
   5. इनके अवयवी कणों (परमाणुओं, अणुओं अथवा आयनों) की स्थितियाँ निश्चित होती हैं और यह कण केवल अपनी माध्य स्थितियों के चारों ओर दोलन कर सकते हैं।

2] द्रव (Liquid): पदार्थ की बहुत था जिसका आकार अनिश्चित एवं आयतन निश्चित हो द्रव कहलाता है
उदाहरण जैसे पानी, अल्कोहल ,मिट्टी का तेल आदि
     द्रव अवस्था में कणों की गतिज ऊर्जा ठोस अवस्था की अपेक्षा कम होती है| द्रव अवस्था में कणों का कोई निश्चित व्यवस्थापन नहीं होता है फिर भी यह कण इतने समीप होते हैं| कि इनका आयतन निश्चित होता है।
    द्रव अवस्था में अंतराकणीय बल इतने प्रबल होते हैं कि हैं| कि घटक कणों को एक निश्चित सीमा रेखा में बांधकर रखते हैं| किंतु यह कण इन्ही सीमाओं के अंदर स्थानांतरीय गति करते हैं। अतः इनका आकार निश्चित नहीं होता है तथा यह जिस कंटेनर में रखे जाते हैं| उसी का आकार ग्रहण कर लेते हैं।
       द्रव पदार्थों की संपीड्यता ठोस की तरह ही कम होती है| द्रव पदार्थों में मुक्त प्रसार नहीं होता है तथा तापीय प्रसार कम होता है| यह ठोसों से  निम्न घनत्व के होते हैं तथा इनमें बहने का गुण पाया जाता है।
3] गैस (gas): बाजार की बह भौतिक अवस्था जिसमें आकार एवं आयतन दोनों ही अनिश्चित हो गैस कहलाता हैं| उदाहरण हवा ,ऑक्सीजन

नोट: गैसों का कोई पृष्ठ नहीं होता इनका visaran बहुत अधिक होता है| तथा इसे आसानी से समपीड़ित किया जा सकता है|
     ताप एवं दाब में परिवर्तन करने किसी भी पदार्थ की अवस्था को बदला जा सकता है| परंतु उसके अपबाद भी है जैसे लकड़ी पत्थर,

    #जल तीनों अवस्था में रह सकता है

    #यह padarth की सबसे सरल अवस्था है। इसमें घटक कणों के मध्य आकर्षण बल कार्य नहीं करता है| जिससे यह कण स्वतंत्र रूप से  गति करने के लिए मुक्त होते हैं| इन के कणों में किसी भी स्थान को पूरी तरह से भरने की प्रवृत्ति होती है| अतः इनका आकार एवं आयतन निश्चित नहीं होता है|
       गैस अवस्था में अंतराकणीय दूरी पदार्थ की अन्य अवस्थाओं की अपेक्षा अधिकतम होती हैं| गैसों की संपीड्यता उच्च होती है तथा इसी कारण दाब बढ़ाने पर इनका आयतन घटता है| इनमें अनंत तक प्रसार होता है एवं इनका तापीय प्रसार भी उच्च होता है।
        गैस के अणुओं के बीच लगने वाले अंतराणुक बलों के क्षीण होने के कारण गैसों के घनत्व कम होते हैं| गैसों की गुणों की व्याख्या उसकी मात्रा ताप, दाब एवं आयतन के पदों में की जाती है|

4] प्लाजमा (Plasma): यह एक गर्म आयनित गैस है जिसमें धनात्मक आयनों और ऋणात्मक आयनों की लगभग बराबर संख्या होती है| 
     प्लाज्मा की विशेषताएं सामान्य गैसों से काफी अलग हैं|
     इसलिए प्लाज्मा को पदार्थ की चौथी अवस्था माना जाता है। 
     उदाहरण के लिए, क्योंकि प्लाज्मा विद्युत रूप से आवेशित कणों से बने होते हैं|
     वे विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों से काफी प्रभावित होते हैं| जबकि सामान्य गैस ऐसा नहीं करते हैं।
     प्लाज्मा में धनावेश और ऋणावेश की स्वतंत्र रूप से गमन करने की क्षमता प्लाज्मा को विद्युत चालक बनाती है।
     गैस की तरह प्लाज्मा का कोई निश्चित आकार या निश्चित आयतन नहीं होता
     लेकिन गैस के विपरीत किसी चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में यह एक फिलामेंट, पुंज या दोहरी परत जैसी संरचनाओं का निर्माण करता है।

5] बोस-आइंस्टीन कन्डनसेट (Bose-Einstein Condensate) इसको जानने से पहले यह बोसॉन कण के बारे में जानना जरूरी है।
ब्रह्मांड में प्रत्येक कण को दो श्रेणियों में से एक में रखा जा सकता है – फर्मियन (fermions) और बोसोन्स (bosons)। 
     आपके आस-पास के अधिकांश पदार्थों के लिए फर्मियन ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि उनमें इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन शामिल हैं। 
     जब आप एक साथ कई फर्मियन मिलते हैं, तो वे एक बोसोन बन सकते हैं।
    बोस-आइंस्टाइन संघनित पदार्थ की एक अवस्था जिसमें बोसॉन की तनु गैस को परम शून्य ताप (0 K या −273.15 °C) के बहुत निकट के ताप तक ठण्डा कर दिया जाता है।
     पदार्थ की इस अवस्था की सबसे पहले भविष्यवाणी 1924-25 में सत्येन्द्रनाथ बोस ने की थी। 
    अतः उन्हीं के नाम पर इस पदार्थ का नाम रखा गया है।

2] रसायनिक वर्गीकरण
         अ] शुद्ध पदार्थ
1) तत्व 2) यौगिक
          ब] मिश्रण
1) समांग 2) विषमांग

अ] शुद्ध पदार्थ:
1) तत्व:- वह शुद्ध पदार्थ जिसमें किसी ज्ञात भौतिक एव रासायनिक विधि से न तो दो या दो से अधिक पदार्थों में विभाजित किया जा सकता है| और न हीं पदार्थों के योग से बनाया जा सकता है| जैसे सोना चांदी ऑक्सीजन
यह प्रकृति ने स्वतंत्र अवस्था में पाया जाता है|
2) योगिक:- वह शुद्ध पदार्थ जो रासायनिक रुप से दो या दो से अधिक तत्वों के एक निश्चित अनुपात में रासायनिक सहयोग से बनाया है| योगिक कहलाता है|
ब]मिश्रण: पदार्थ जो दो से अधिक तत्वों या योगिक के किसी भी अनुपात में मिलाने से प्राप्त होता है| मिश्रण है
1)समांगी मिश्रण: निश्चित अनुपात में अब लोगों को मिलाने से समान मिश्रण का निर्माण होता है| इसके प्रत्येक भाग के गुण धर्म एक समान होते हैं| जैसे चीनी या नमक के विलियन
2)विसमांगी मिश्रण: आनिश्चित अनुपात में अवयव को मिलाने से विशमागी मिश्रण का निर्माण होता हैं| इसके प्रभाव के गुण एवं उसके संगठन भिन्न-भिन्न न होते हैं| जैसे बारुद ,कुहासा

पदार्थ या द्रव्य के गुण अथवा विशेषताएं (Quality Of Matter In Hindi)
पदार्थ या द्रव्य के गुण अथवा विशेषताएं (Quality Of Matter In Hindi)
1. पदार्थ के कण बहुत ही छोटे छोटे होते हैं।
2. पदार्थ के कणों के मध्य में कुछ खाली जगह या रिक्त स्थान पाया जाता हैं।
3. पदार्थ के कण लगातार गतिशील रहते हैं| अर्थात पदार्थ के कण हमेशा लगातार गति करते रहते है।
4. पदार्थ के कणों के मध्य आपस में आकर्षण पाया जाता हैं| अर्थात इसके कण आपस में एक दूसरे को आकर्षित करते रहते हैं|

पदार्थों से संबंधित कुछ अन्य परिभाषाएं:
# ठोस पदार्थ किसे कहते हैं? से आप क्या समझते हैं?
      वे पदार्थ जिनका निश्चित आकार, स्पष्ट सीमा, स्थिर आयतन होता है, उन्हें ही ठोस पदार्थ कहते हैं। इन पदार्थों में उच्च यंग मापांक एवं अपरूपता मापांक होते हैं। इसके विपरीत, ज्यादातर तरल पदार्थ निम्न अपरूपता मापांक वाले होते हैं। एवं श्यानता का प्रदर्शन करते हैं। भौतिकी की जिस शाखा में ठोस का अध्ययन करते हैं, उसे ठोस अवस्था भौतिकी कहते हैं। पदार्थ विज्ञान में ठोस पदार्थों के भौतिक और रासायनिक गुणों एवं उनके अनुप्रयोग का अध्ययन करते हैं। ठोस-अवस्था रसायन में पदार्थों के संश्लेषण, उनकी पहचान और रासायनिक संघटन का अध्ययन किया जाता है।
# शुद्ध पदार्थ किसे कहते हैं? से आप क्या समझते हैं।
वे पदार्थ जिसके सभी भागों  में समान संरचना एवं समान गुण होते हैं, क्योंकि इसमें केवल एक तरह के कण होते हैं। जैसे कि, चीनी एवं नमक शुद्ध पदार्थ हैं। यह किसी विशिष्ट तापमान पर अपनी अवस्था में बदलते है। 100 डिग्री सेल्सियस पर पानी वाष्प में बदलने लगता है और जैसे 0 डिग्री सेल्सियस पर बर्फ में बदलता है|
धन्यवाद्!

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