रेडक्लिफ, मैकमोहन, डूरंड रेखा/redclif, durand, makmohan rekha

रेडक्लिफ, मैकमोहन, डूरंड रेखा- redclif, durand, makmohan rekha

रेडक्लिफ, मैकमोहन, डूरंड रेखा- redclif, durand, makmohan rekha

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       > डूरंड रेखा

आज के इस लेख में हम रेखाओं के बारे में जानेंगे को की मुख्य रूप से तीन रेखाएं रेडक्लिफ, मैकमोहन, डूरंड रेखा है उन्हें मैंने विस्तार से बताता हुआ लेख को पूरा किया है। 
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रेडक्लिफ रेखा (Redclif Rekha In Hindi)

रेडक्लिफ रेखा भारत और पाकिस्तान को अलग करने वाली एक रेखा का नाम है। प्रमुख रूप से India and Pakistan के बीच की इस Radcliffe line का निर्धारण Sir Cyril Radcliffe द्वारा वर्ष 1947 के समय किया था।

 यह Line के निर्धारण के उस Time में Bangladesh पूर्वी Pakistan के नाम से जाना जाता था और Pakistan का ही एक भाग था। 

जिसके पश्चात बाद में पूर्वी Pakistan के Bangladesh के रूप में स्वतंत्र होने के बाद India and Bangladesh के बीच की भी सीमा रेडक्लिफ रेखा बन गई।  

Radcliffe line जो की Pakistan and India को एक दूसरे से विभाजित करती है, विभिन्न शहरी क्षेत्रों से लेकर निर्जन रेगिस्तान के अलगअलग क्षेत्रों से होकर जाती है।

 आगे चल कर यह सीमा अरब सागर में, Pakistan के मनोरा द्वीप से मुंबई के हार्बर के रास्ते पर चलती हुई दक्षिण पूर्व तक पहुंचती जाती है।

India and Pakistan सीमा पर स्वतंत्रता के बाद से ही, दोनो देश के बीच कई संघर्ष और युद्ध देख चुका हैं, और यह world की सबसे जटिल सीमाओं में से एक मानी गई है।  

पीबीएस के द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार सीमा की कुल लंबाई 2900 कि.मी (1800 मील) हैं। यह 2011 में विदेश नीति में लिखे गए लेख के आधार पर, world की सबसे खतरनाक सीमाओं में से एक हैं।

 India द्वारा लगभग 50 हजार खम्बों पर 150000 तेज रोशनी वाले बल्ब स्थापित किये जाने के कारण रात में भी इसे अंतरिक्ष से देखा जा सकता है।

मैकमोहन रेखा (McMahon Line in Hindi)

मैकमोहन रेखा India को China से अलग अलग करती है। तथा इसका निर्धारण Sir Henry McMahon रेखा द्वारा वर्ष 1914 में किया गया था।

McMahon Line, India और Tibet के बीच सीमा रेखा है। यह अस्तित्व में सन् 1914 में भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत स्थापित हुई ।

  1914 पश्चात के अगले कई वर्षो तक इस सीमा रेखा का अस्तित्व कई अन्य विवादों के कारण कहीं छुप गया था।

परन्तु 1935 में ओलफ केरो नामक एक अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी ने तत्कालीन अंग्रेज सरकार को इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने का अनुरोध किया। 

1937 में सर्वे ऑफ इंडिया के एक मानचित्र में McMahon Line को आधिकारिक भारतीय सीमा रेखा के रूप में पर दिखाया गया था। 

इस सीमा रेखा का नाम Sir Henry McMahon के नाम पर रखा गया था, जिनकी इस समझौते में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी तथा वे भारत की तत्कालीन अंग्रेज सरकार के विदेश सचिव थे। अधिकांश हिमालय से होती हुई।

 सीमा रेखा पश्चिम में भूटान से 890 कि.मीटर और पूर्व में ब्रह्मपुत्र तक 260 कि.मीटर तक फैली हैं । जहां भारत के अनुसार यह चीन के साथ उसकी सीमा है ।

वही, चीन 1914 के शिमला समझौते को मानने से इनकार करता हैं । चीन के अनुसार Tibet स्वायत्त राज्य नहीं था और उसके पास किसी भी प्रकार के समझौते करने का कोई अधिकार नहीं था ।

 चीन के आधिकारिक मानचित्रों में McMahon रेखा के दक्षिण में 56 हजार वर्ग मील के क्षेत्र को तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। इस क्षेत्र को चीन में Southern tibet के नाम से जाना जाता है ।

1962 - 63 के भारत - चीन युद्ध के समय चीनी फौजों ने कुछ समय के लिए इस क्षेत्र पर अधिकार भी जमा लिया था ।

 इस कारण ही वर्तमान समय तक इस सीमारेखा पर विवाद यथावत बना हुआ है। किन्तु India - China के बीच भौगोलिक सीमा रेखा के रूप में इसे अवश्य माना जाता है ।

डूरंड रेखा (Durand line In Hindi)

इस रेखा का नाम Sir Martimer Durand के नाम पर रखा गया है । इन्होंने Afghanistan के अमीर अब्दुर रहमान खाँ को इसे सीमा Line मानने पर राजी किया था ।

Durand रेखा India को Afghanistan से अलग अलग करती है। डूरंड रेखा का निर्धारण Sir Henry Mortimer Durand द्वारा वर्ष 1896 में किया गया था । India के विभाजन से पूर्व, India और Pakistan एक ही देश थे। 

India और Afghanistan की सीमा का निर्धारण डूरंड रेखा द्वारा ही होता था । यह India की सबसे छोटी सीमा रेखा है और वर्तमान में "पाक-अधिकृत कश्मीर" (PoK) और Afghanistan को अलग अलग करती है ।

Afghanistan and India के बीच 2430 कि.मीटर लम्बी अन्तराष्ट्रीय सीमा का नाम डूरण्ड रेखा है । Durand line 1896 में एक समझौते के द्वारा स्वीकार की गयी थी।

 यह रेखा पश्तून जनजातीय क्षेत्र से होकर दक्षिण में बलोचिस्तान से बीच से होकर गुजरती है। इस प्रकार यह रेखा पश्तूनों तथा बलूचों को दो देशों में बाँटते हुए निकलती है।

भू-राजनैतिक और भू-रणनीति की दृष्टि से डूरण्ड रेखा को world की सबसे खतरनाक सीमा माना जाता है । 

Afghanistan इस सीमा को अस्वीकार करता रहा है । अफ़्गानिस्तान चारों ओर से जमीन से घिरा हुआ है। और इसकी सबसे बड़ी सीमा पूर्व की ओर भारत से लगी है, इसे डूरण्ड रेखा कहते हैं।

यह 1893 में हिंदुकुश में स्थापित सीमा है। जो Afghanistan और ब्रिटिश भारत के जनजातीय क्षेत्रों से उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों को रेखांकित करती हुयी गुजरती है । आधुनिक काल में यह Afghanistan and India के बीच की सीमा रेखा है।

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