संज्ञा किसे कहते हैं? ♦ट्रिक से – संज्ञा की परिभाषा, भेद – What Is Noun In Hindi. Definition & Types

संज्ञा किसे कहते हैं (What Is Noun In Hindi. Definition & Types) = किसी व्यक्ति , वस्तु ( टेबल , कुर्सी ) , स्थान या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे — अंगूर , देश ,चाँवल , सोना , कोमलता , आम , भैंस आदि।
संज्ञा किसे कहते हैं ट्रिक से - संज्ञा की परिभाषा - संज्ञा के भेद - What Is Noun In Hindi. Definition & Types
संज्ञा (Noun) किसे कहते हैं।  की परिभाषा (definition) के भेद / sangya kise kahate hain (what is noun in hindi) 

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                 > जातिवाचक ,
                 > व्यक्तिवाचक ,
                 > भाववाचक ,
                 > द्रव्यवाचक ,
                 > समूहवाचक ,

संज्ञा किसे कहते हैं।  की परिभाषा। के भेद / sangya kise kahate hain

संज्ञा किसे कहते हैं परिभाषा – What Is Noun In Hindi 

»संज्ञा (Noun) किसे कहें परिभाषा किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम कोसंज्ञा कहते हैं. उदाहरण - श्याम (व्यक्ति), टेबल (वस्तु), भोपाल (स्थान), व्यथा (भाव) इत्यादि।इसके तहत जातिवाचक, व्यक्तिवाचक, भाववाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक संज्ञा जैसे पांच प्रकार के भेदों को इसमें समाहित नीचे क्रम दिया गया है।«

Sangya की Paribhasha को सिर्फ पढ़ लेने से इसके बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती है। इसलिए इस लेख में हम आगे आपके लिए इससे सबंधित अन्य जैसे इसके भेद, प्रकार संज्ञा किसे कहते हैं क्या होती है सभी भेदों को विस्तार से नीचे समझाएंगे! तो चलिए लेख प्रारंभ करें। what is noun in hindi

संज्ञा किसे कहते हैं?  परिभाषा

एक बार दोवारा आपको मैं बता दू यह किसी भी व्यक्ति का नाम या वस्तु का नाम या कोई जाति का नाम भाव या स्थान के नाम हो सकता है उसे ही संज्ञा कहते हैं। अब इसके उदाहरण बता दूं जैसे:- मनुष्य (जाति हैं), मुंबई और भारत (स्थान हैं), बचपन और मिठास (भाव हैं), किताब व टेबल (वस्तु है) इत्यादि। तो आपको अब sangya और इसकी परिभाषा से आप अच्छी तरह परिचित हो गए होंगे।

हिंदी भाषा या व्याकरण की साइंस में, संज्ञा (Noun) एक विशाल और बड़ा, मुक्त शाब्दिक वर्ग का सदस्य के तहत है, जिसके सदस्य वाक्यांश के कर्ता के प्रमुख शब्द, पूर्वसर्ग के कर्म या क्रिया के कर्म  के तरह उपस्थित हो सकते हैं कहते हैं

शाब्दिक वर्गों को इस संदर्भ में परिभाषा दी जाती हैं कि उनके सदस्य अभिव्यक्तियों के अन्य रूपों के साथ किस प्रकार संयोजित होते हैं। 

संज्ञा के लिए भाषा के तहत वाक्यात्मक नियम अलग अलग प्रकार के होते हैं। अंग्रेज़ी भाषा के तहत, संज्ञा को उन शब्दों के रूप में परिभाषा दी जाती है, जो उपपद एवं गुणवाचक विशेषणों के साथ होते हैं और संज्ञा किसी भी वाक्यांश के प्रमुख शीर्ष के रूप में वर्क कर सकते हैं।

पारंपरिक अंग्रेज़ी व्याकरण के तहत संज्ञा, 8 शब्द भेदों में से एक प्रमुख है।


यहहिंदी व्याकरण का एक अच्छा और पहला टॉपिक है. और जो भी व्यक्ति इसके बारे में इंटरनेट पर जानकारी के लिए खोजते है. वो हमेशा ही sangya kise kahate hain. क्या है? इसके भेद और प्रकार इत्यादि तरीके लिखकर ही सर्च करते है चलो अब इसके बारे में लेख को प्रारंभ करते है.

संज्ञा के भेद | संज्ञा के प्रकार – Types Of Noun In Hindi

संज्ञा के भेद | संज्ञा के प्रकार
संज्ञा के पांच भेद/प्रकार होते हैं दोस्तो sangya के मुख्य रूप से पाँच भेद या प्रकार हैं जो कि नीचे क्रमिक रुप से बताए हुए हैंं.
  • 1. जातिवाचक संज्ञा,
  • 2. व्यक्तिवाचक संज्ञा,
  • 3.भाववाचक संज्ञा,
  • 4. द्रव्यवाचक संज्ञा,
  • 5. समूहवाचक संज्ञा
आइए इन सभी भेदों को विस्तार से एवं उनके उदाहरण के साथ पढ़ें जिससे इनसे संबंधित कोई भी प्रश्न आपके मन में ना रहें! और इन सभी भेदों के व्याख्या के बाद Sangya से संबंधित प्रश्नों को नीचे बताया जाएगा उन्हें भी अवश्य पढ़ें।।

यह भी पढ़ें:



जातिवाचक संज्ञा 
जातिवाचक संज्ञा उस को कहते हैं, जिसका नाम लेने से उस व्यक्ति या पदार्थ की जाति का बोध होता है।
यथा:- गधा, फल, मानव, किसी धर्म की जाति जैसे राजपूत इत्यादि।
इन उदाहरण के वाक्य जैसे 
   1. गधा सामान लेकर जाता हैं।
   2. यह फल आम का हैं।
   3. मानव के अंदर सोचने की शक्ति होती है।
   4. वह राजपूत जाति का हैं।




व्यक्तिवाचक संज्ञा
जिन शब्दों से किसी भी खास व्यक्ति, स्थान अथवा वस्तु का बोध होता हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहेंगे।
जैसे गोरखपुर, मुंबई, भारत, रामायण, अमेरिका इत्यादि।
इन उदाहरण के वाक्य जैसे
   1. गोरखपुर में बहुत सारी ट्रेन प्रारंभ होती है।
   2. मुंबई को भारत का प्रवेश द्वार कहते हैं।
   3. भारत एक देश है।
   4. रामायण वाल्मीकि द्वारा रचा गया है।
   5. अमेरिका का राष्ट्रपति कौन हैं।
भाववाचक संज्ञा 
जिस संज्ञा शब्द से पदार्थों की अवस्था, गुण-दोष, भाव या दशा, धर्म आदि का बोध होता हो, वह भाववाचक संज्ञा हैं।
जैसे: बचपन, मोटापा, बुढ़ापा, मिठास, चढ़ाई, थकावट आदि। 
इन उदाहरण के वाक्य
   1. बचपन में कृष्ण में माखन खाया।
   2. मोटापा अच्छा नहीं होता हैं।
   3. श्याम की माताजी का बुढ़ापा आने वाला है।
   4. वाणी में मिठास होनी चाहिए।
   5. गिट्टी ऊपर चढ़ाई
   6. ज्यादा काम से थकावट हो गई।


द्रव्यवाचक संज्ञा
किसी संज्ञा शब्द से किसी द्रव्य (पदार्थ) का बोध हो रहा हो, तो द्रव्यवाचक संज्ञा कहेंगे।
जैसे: घी, पानी, लोहा, तेल, दाल इत्यादि।
इन उदाहरण के वाक्य
   1. घी में वसा होता है।
   2. पानी एक तरल पदार्थ हैं।
   3. लोहा जंग के कारण वजनदार हो गया है।
   4. यह सरसों का तेल हैं।
   5. दाल में प्रोटीन होता हैं। 
समूहवाचक संज्ञा 
किसी संज्ञा शब्द से व्यक्ति या वस्तु के समूह का बोध हो, तो उसे समूहवाचक संज्ञा कहेंगे।
जैसे: पुलिस, सेना, परिवार, कक्षा, भीड़, इत्यादि।
इन सभी के वाक्य
   1. पुलिस कोरोना काल में बहुत मदद कर रही है।
   2. देश की रक्षा सेना बहुत अच्छे से करती हैं।
   3. तुम्हारे परिवार में कितने पुरुष है।
   4. राहुल कक्षा 9th में हैं।
   5. भीड़ भाड़ से दूर रहकर हम कॉरोना से बच सकते हैं।




Sangya को कैसे पहचाने इसकी पहचान क्या होती है!
संज्ञा की पहचान हम शब्दों से लगा सकते है जिसमें संज्ञा शब्द प्राणीवाचक भी हो सकते हैं और अप्राणिवाचक भी हो सकते है। इसके अलावा भी  गणनीय या अगणनीय शब्द भी ही सकते है ।जब हम सभी को विस्तार में पढ़ें तो हमें इसका ज्ञान प्राप्त होता है साथ ही साथ इसमें उदाहरणों को भी कवर करते चलेंगे!
1] प्राणीवाचक संज्ञा शब्द
उस कहेगें जिससे किसे सजीव वस्तु का बोध हो जिसमें प्राण हो, प्राणीवाचक संज्ञा कहते है उदाहरण: लड़की, लड़का, बेल, भैंस, श्याम, सुरेश इत्यादि! सभी में प्राण पाया जाता है इससे यह इस के अन्तर्गत है।
2] अप्राणिवाचक संज्ञा शब्द
उस कहेंगे जिसमें प्राण न हो वह अप्राणिवाचक संज्ञा है! उदाहरण टेबल, पेन, किताब, जूते, पृथ्वी, रेल इत्यादि! सभी शब्दों में प्राण नहीं है यानिकि ये सजीव नहीं है। इसके कारण यह सभी इस के अन्तर्गत है।
3] गणनीय संज्ञा शब्द
उस कहेंगे! जिस व्यक्ति वस्तु, पदार्थ आदि की गणना की जा सकें। उसकी संख्या ज्ञात की जा सकती है ऐसे शब्द को गणनीय संज्ञा शब्द कहेंगे! उदाहरण: पेन, भैंस, पुस्तक, केले, हाथी इत्यादि!
4] अगणनीय संज्ञा शब्द
उन्हें कहेंगे जिस व्यक्ति, वस्तु , पदार्थ आदि की गणना नहीं की जा सकती है। उसकी संख्या ज्ञात नहीं की जा सकें, उन्हें अगणनीय संज्ञा शब्द कहेंगे! उदाहरण: शराब, जल, दुग्ध, मित्रता, प्यार इत्यादि!

आइए अब आपको हम बताते गई की लोग इंटरनेट पर Sangya से बारे में किस किस तरीके से सर्च करते है. और उनके सभी प्रकार के प्रश्नों के जवाब भी बड़ी आसानी से! इस लेख में दिए गए हैं।

• उपसर्ग किसे कहते हैं? उपसर्ग की परिभाषा और 50+ उदाहरण

• विशेषण किसे कहते हैं? इसके भेद कितने होते है? एवं सटीक परिभाषा

• सर्वनाम किसे कहते हैं? सर्वनाम के भेद उदाहरण सहित

संज्ञा से संबंधित:FAQs
Q1. संज्ञा किसे कहते हैं? उसके कितने प्रकार हैं?
Ans. संज्ञा किसे कहें: किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। इस के पांच प्रकार होते हैं? व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, समूहवाचक, द्रव्यवाचक और भाववाचक!
2. संज्ञा की परिभाषा क्या होती है?
Ans. परिभाषा:- किसी व्यक्ति, वस्तु , स्थान या भाव के नाम को sangya kahate hain।
3. जातिवाचक और व्यक्तिवाचक संज्ञा क्या है?
Ans. जातिवाचक संज्ञा:- उसी को कहते हैं जिसका नाम लेने से उस व्यक्ति अथवा पदार्थ की जाति भर का बोध होता है। जैसे घोड़ा, फूल, मनुष्य, किसी धर्म की जाति जैसे गुर्जर आदि।
व्यक्तिवाचक संज्ञा:- जिन शब्दों से किसी खास व्यक्ति, स्थान या वस्तु का बोध हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे जयपुर, दिल्ली, भारत, रामायण, अमेरिका, इत्यादि
4. अर्थ के आधार पर संज्ञा के कितने भेद होते हैं?
Ans. अपडेट हो रहा है...





संज्ञा से संबंधित कुछ प्रश्न
1. हरियाली शब्द है।
क) जातिवाचक   
ख) समूहवाचक
ग) व्यक्तिवाचक    
घ) भाववाचक  
उत्तर:- घ) भाववाचक।
2. मित्रता भाववाचक संज्ञा किससे है।
क) सर्वनाम                    
ख) क्रिया
ग) जातिवाचक संज्ञा      
घ) व्यक्तिवाचक संज्ञा
उत्तर:- ग) जातिवाचक संज्ञा।
3. व्याकरणाचार्यों ने संज्ञा के कितने भेद बताये हैं।
क) पाँच           
ख) चार
ग) छ:             
घ) तीन
उत्तर:- क) पाँच।


4. घी कौन सी संज्ञा है।
क) व्यक्तिवाचक     
ख) भाववाचक
ग) द्रव्यवाचक        
घ) जातिवाचक
उत्तर:- ग) द्रव्यवाचक।
5. अशोक मार्ग है।
क) भाववाचक    
ख) द्रव्यवाचक
ग) जातिवाचक       
घ) व्यक्तिवाचक
उत्तर: घ) व्यक्तिवाचक।
6. जातिवाचक sangya के उदाहरण है।
क) घोड़ा   
ख) गंगा
ग) सभा    
घ) बुढ़ापा
उत्तर:- क) घोड़ा।
7. टाइम्स ऑफ डे दिया है।
क) भाववाचक     
ख) जातिवाचक
ग) समूहवाचक     
घ) व्यक्तिवाचक।
उत्तर:- घ) व्यक्तिवाचक।
8) कबूतर कौन-सी सं-ज्ञा है।
क) समूहवाचक 
ख) व्यक्तिवाचक
ग) जातिवाचक 
घ) भाववाचक
उत्तर:- ग) जातिवाचक
9) बंधुत्व किस प्रकार की sangya
क) व्यक्तिवाचक            
ख) कोई नहीं।
ग) जातिवाचक संज्ञा     
घ) भाववाचक
उत्तर: घ) भाववाचक
10) सभा कौन-सी संज्ञा है
क) व्यक्तिवाचक     
ख) समूहवाचक
ग) द्रव्यवाचक        
घ) जातिवाचक
उत्तर:- ख) समूहवाचक।



सर्वनाम



सर्वनाम किसे कहते हैं?
जिन शब्दों का इस्तेमाल संज्ञा शब्द के स्थान पर प्रयुक्त होता है. उन शब्दों को सर्वनाम कहते हैं. 
या
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं. जैसे कि मैं, तू , हम , तुम , तू , वह , यह आदि.

परिभाषा
कामताप्रसाद गुरू के अनुसार - सर्वनाम उस विकारी शब्द को कहते हैं, जो पूर्वापर संबंध से किसी भी संज्ञा के बदले में आता है. जैसे, मैं (बोलनेवाला), तू (सुननेवाला), यह (निकट-वर्ती वस्तु), वह (दूरवर्ती वस्तु) इत्यादि.

★ वाक्य में जिस शब्द का प्रयोग संज्ञा के बदले में होता है, उसे सर्वनाम कहते हैं. 
★ सर्वनाम शब्द का अर्थ है- सब का नाम. 

★ संज्ञा जहाँ केवल उसी नाम का बोध कराती है, जिसका वह नाम है, वहाँ सर्वनाम से केवल एक के ही नाम का नहीं, सबके नाम का बोध होता है. 

जैसे कि रेखा कहने से केवल इस नाम लड़की का बोध होगा किन्तु यदि मीरा, सीमा, राहुल, विजय सभी अपने लिए मैं का प्रयोग करते हैं तो मैं इन सबका नाम होगा. 


इसी तरह बोलनेवाले अनेक नामों के बदले तुम या आप और सुननेवाले अनेक नामों के बदले वह या वे का प्रयोग होता है. जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग व्यक्तिवाचक संज्ञा के स्थान पर किया जाता है उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं .
जैसे - मैं, तुम, हम, आप, वे 

★ हिंदी के मूल सर्वनाम 11 हैं, जैसे- मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कौन, क्या, कोई, कुछ.

सर्वनाम के भेद कितने प्रकार के होते हैं.
प्रयोग की अनुसार सर्वनाम के 6 प्रकार हैं
1. पुरूषवाचक :- मैं, तू, वह, हम, मैंने
2. निजवाचक :- आप
3. निश्चयवाचक :- यह, वह
4. अनिश्चयवाचक :- कोई, कुछ
5. संबंधवाचक :- जो, सो
6. प्रश्नवाचक :- कौन, क्या

लिंग 



लिंग किसे कहते हैं? परिभाषा
परिभाषा= जिस चिह्न से यह बोध होता हो कि अमुक शब्द पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का है, उस चिन्ह या शब्द की ही लिंग कहते हैं."
अन्य शब्दों में "शब्द के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु आदि के पुरुष जाति या स्त्री जाति के होने का ज्ञान हो उसे लिंग कहते हैं.
जैसे : शेर, शेरनी, लड़का, लड़की, हिरण, हिरणी आदि.

ऊपर के उदाहरण में शेर और लड़का पुल्लिंग तथा शेरनी और लड़की स्त्रीलिंग हैं.

लिंग के भेद कितने प्रकार के होते है
यह दो प्रकार कि होती है.
1] पुल्लिंग
2] स्त्रीलिंग

स्त्रीलिंग और पुल्लिंग दोनों भेदों को विस्तार से
1] पुल्लिंग
जिन संज्ञा शब्दों से पुरुष जाति का बोध हो या जो शब्द पुरुष जाति के अंतर्गत आते हैं, उन्हें ही पुल्लिंग कहते हैं. जैसे कि :- बैल, घर, शेर, पेड़, बालक आदि.

2] स्त्रीलिंग
जिन संज्ञा शब्दों से स्त्री जाति का बोध हो अथवा जो शब्द स्त्री जाति के अंतर्गत आते हैं, उन्हें ही स्त्रीलिंग कहते हैं . जैसे कि:-  घड़ी, लड़की , नारी, छड़ी, गाय कुर्सी आदि.

लिंग की पहचान कैसे करते है नीचे देखे

पुल्लिंग की पहचान
जिन शब्दों में (आ,  आव,  पा,  पन, न) ये प्रत्यय जिन शब्दों के अंत में आए. वे समन्यतः पुल्लिंग शब्द हैं. जैसे कि :-  बुढ़ापा, लड़कपन, कपड़ा, चढ़ाव लेन-देन आदि

★ पेड़ों के नाम पुल्लिंग होते हैं.
जैसे कि :- सागौन , जामुन, बरगद , आम , शीशम आदि.

★ पर्वत , मास , वार और कुछ ग्रहों के नाम पुल्लिंग होते हैं . जैसे कि :- विंध्याचल, हिमालय,  वैशाख, सूर्य , बुध , राहु , चंद्र , मंगल , केतु आदि.
★ द्रव पदार्थों के नाम पुल्लिंग होते हैं.
जैसे कि :- ताँबा,  लोहा,  घी , पानी,  सोना, तेल आदि.

★ अनाजों के नाम पुल्लिंग होते हैं.
जैसे कि :- जौ,  उड़द , गेहूँ , चावल, चना, मटर , आदि.

★ शरीर के अंगों के नाम सामान्यत: पुल्लिंग होते हैं. जैसे कि :-कान, गला, हाथ, पाँव, होंठ, तालु, नख, सिर,  मस्तक,  दाँत, मुख, रोम आदि.

★ रत्नों के नाम पुल्लिंग होते हैं.
जैसे कि :- पन्ना,  मूँगा, हीरा, मोती आदि.

★ जल , स्थान और भू-मंडल के भागों के नाम पुल्लिंग होते हैं. जैसे कि :- समुद्र, भारत, देश, नगर, द्वीप, आकाश, पाताल, घर, सरोवर आदि.

स्त्रीलिंग की पहचान
जिन भाववाचक संज्ञाओं के अंत में ट, वट, या हट होता है. वे स्त्रीलिंग कहलाती हैं .
जैसे कि :- झंझट, आहट, चिकनाहट, बनावट, सजावट आदि.

जिन संज्ञा शब्दों के अंत में ख होते है,  वे स्त्रीलिंग कहलाते हैं. जैसे कि :- राख, कोख, लाख, आँख, भूख, चोख, देख रेख आदि .

जिन शब्दों के अंत में इया आता है वे स्त्रीलिंग होते हैं. जैसे कि :- कुटिया,  खटिया,  चिड़िया आदि.

अनुस्वारांत,  ईकारांत,  ऊकारांत,  तकारांत,  सकारांत संज्ञाएँ स्त्रीलिंग कहलाती है . जैसे कि : रोटी, टोपी, नदी, चिट्ठी, उदासी, रात, बात, छत, भीत, लू, बालू, दारू,  सरसों, खड़ाऊँ, प्यास, वास, साँस आदि .
भाषा, बोली और लिपियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं. जैसे कि :- देवनागरी, पहाड़ी, तेलुगु, मैथिली, हिन्दी, संस्कृत, पंजाबी, गुरुमुखी.

नदियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं .
जैसे कि:- गोदावरी,  सरस्वती, नर्मदा, यमुना आदि.

तारीखों और तिथियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं.
जैसे कि :- पहली, दूसरी, प्रतिपदा, पूर्णिमा आदि.

कुछ शब्द पुल्लिंग और स्त्रीलिंग लिस्ट नीचे बताए हैं.
पुल्लिंग            =   स्त्रीलिंग
मैना                =  नर मैना
तितली            =  नर तितली
बाज                = मादा बाज
खटमल            =   मादा खटमल
चील                 =  नर चील
भेड़िया             =   मादा भेड़िया
उल्लू               =   मादा उल्लू
मच्छर              =   मादा मच्छर
मक्खी              =  नर मक्खी
कोयल             =   नर कोयल
गिलहरी            =  नर गिलहरी
कछुआ             =  नर कछुआ
कौआ               =   नर कौआ

वचन 



वचन किसे कहते हैं? परिभाषा
परिभाषा "व्याकरण में वचन (नम्बर) एक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया इत्यादि की व्याकरण सम्बन्धी श्रेणी होती है जो इनकी संख्या की सूचना प्रदान कराती हैं, वचन कहलाती हैं (एक, दो, इत्यादि). 
अधिकतर भाषाओं में वचन दो ही होते हैं- एकवचन तथा बहुवचन, लेकिन संस्कृत तथा कुछ और भाषाओं में द्विवचन भी देखने को मिलता है."
हिन्दी भाषा में वचन के प्रकार
हिन्दी में वचन दो होते हैं-
      1] एकवचन,
      2] बहुवचन
1] एकवचन
    "जिन शब्द के जिस रूप से एक ही वस्तु का बोध होता है, वह एकवचन कहलाता हैं."
जैसे कि :– माता, माला, पुस्तक, स्त्री, टोपी, लड़का, गाय, सिपाही, बच्चा, कपड़ा, बंदर, मोर.
2] बहुवचन
    "जिन शब्द के जिस रूप से अनेकता का बोध होता हैं, वह बहुवचन कहलाता हैं."
जैसे कि :–माताएँ, पुस्तकें, वधुएँ, गुरुजन, रोटियाँ, स्त्रियाँ, लताएँ, लड़के, गायें, कपड़े, टोपियाँ, मालाएँ, बेटे.

विभिन्न वचन का हिंदी में प्रयोग 
हिन्दी में एकवचन की जगह पर बहुवचन का प्रयोग करना
1] आदर के लिए भी बहुवचन का प्रयोग होता है.
जैसे कि:–
महात्मा गांधी महान पुरुष थे.
सर आज नहीं आये.
चंद्रशेखर सच्चे वीर थे.
2] बड़प्पन दर्शाने के लिए कुछ लोग वह के स्थान पर वे और मैं की जगह हम का प्रयोग करते हैं.
जैसे कि :–
आज गुरुजी आए तो वे प्रसन्न दिखाई दे रहे थे.
मालिक ने कर्मचारी से कहा, हम मीटिंग में जा रहे हैं.
3] केश, रोम, अश्रु, प्राण, दर्शन, लोग, दर्शक, समाचार, दाम, होश, भाग्य इत्यादि ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग अधिकतर बहुवचन में ही होता है.
जैसे कि :–
तुम्हारे केश बड़े सुन्दर हैं.
लोग कहते हैं.

बहुवचन कि जगह पर एकवचन का प्रयोग करना
1] तू एकवचन है जिसका बहुवचन है तुम किन्तु सभ्य लोग आजकल लोक - व्यवहार में एकवचन के लिए तुम का ही प्रयोग करते हैं.
जैसे कि :–
मित्र, तुम कब आए.
क्या तुमने खाना खाया.
2] वर्ग, वृंद, दल, गण, जाति आदि शब्द अनेकता को प्रकट करने वाले हैं, किन्तु इनका व्यवहार एकवचन के समान होता है.
जैसे कि :–
स्त्री जाति संघर्ष कर रही है.
सैनिक दल शत्रु का दमन कर रहा है.
3] जातिवाचक शब्दों का प्रयोग एकवचन में किया जा सकता है.
जैसे कि :–
मुंबई का आम स्वादिष्ट होता है.
सोना बहुमूल्य वस्तु है.

कारक



कारक किसे कहते हैं?
परिभाषा: जो वाक्य में आये संज्ञा आदि शब्दों का क्रिया के साथ संबंध बताते है, उन्हें कारक कहते हैं." या "वाक्य में क्रिया को पूरा कराने में अनेक संज्ञा शब्द संलग्न होते हैं इन संज्ञाओं के क्रिया शब्दों के साथ अनेक प्रकार के संबंध होते हैं. इनके संबंधों को व्यक्त करने वाली व्याकरण की कोटी को कारक कहते हैं."
जैसे :- रविन्द्र ने बुक पढ़ी.

ऊपर के वाक्य में रविन्द्र पढ़ना क्रिया का कर्ता है. एवं बुक उसका कर्म है, अर्थात राहुल कर्ता कारक है और बुक कर्म कारक हैं.
कारक के सभी प्रकार या भेद
कारक आठ प्रकार के होते है

कर्ता ने (या कभी-कभी बिना चिह्न के)
कर्म को
करण से, के द्वारा, के साथ
संप्रदान को, के लिए
अपादान से (अलग होने का सूचक)
संबंध में, पर
अधिकरण का, की, के, रा, री, रे, ना, नी, ने
संबोधन अरे, अरी, रे, ओ, हे, री

सभी प्रकार के कारक के भेदों को विस्तार में पढ़ें!

कर्ता कारक
कर्ता शब्द का अर्थ है — करने वाला
या
जिस रूप से क्रिया या कार्य के करने वाले का बोध होता है. वह कर्ता कारक कहलाता है. कर्ता कारक का विभक्ति — चिह्न "ने" है.

"ने" चिह्न का वर्तमान काल तथा भविष्य काल में प्रयोग नहीं होता है. इसका सकर्मक धातुओं के साथ भूतकाल में प्रयोग होता है.
जैसे-
कृष्ण ने कंस को मारा

ऊपर के वाक्य में क्रिया का कर्ता "कृष्ण" है. इसमें "ने" कर्ता कारक का विभक्ति - चिह्न है. इस वाक्य में "मारा" भूतकाल की क्रिया है.

"ने" शब्द का प्रयोग सामान्यतः भूतकाल में होता है. भूतकाल में अकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ भी ने चिह्न नहीं लगता है.

जैसे- वो रोया.
वर्तमान काल और भविष्यत काल की सकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ "ने" चिह्न का प्रयोग नहीं होता है.
जैसे - वह गाना गाता है.

वह गाना गाएगा.
कभी - कभी कर्ता के साथ "को" और "स" का प्रयोग भी किया जाता है.

बालिका को सो जाना चाहिए .
मीरा से पुस्तक पढ़ी गई .

कर्म कारक
क्रिया के कार्य का फल जिस पर पड़ता है. उसे कर्म कारक कहते हैं. इस कारक का चिह्न "को" है. यह चिह्न भी बहुत - से स्थानों पर नहीं लगता.
जैसे :-  राहुल ने साँप को मारा.

पहले वाक्य में "मारा" क्रिया है. और साँप कर्म है. क्योंकि मारने की क्रिया का फल साँप पर पड़ा है. इसलिए साँप कर्म कारक है.

रानी ने पत्र लिखा.
दूसरे वाक्य में "लिखने" की क्रिया का फल पत्र पर पड़ा. इसलिए पत्र कर्म कारक है. इसमें कर्म कारक का चिह्न "को" नहीं लगा है.

करण कारक 
वाक्य की क्रिया को संपन्न करने के लिए जिस निर्जीव संज्ञा का प्रयोग किसी साधन के रूप में किया जाता है. उस संज्ञा करण कारक कहलाता है. इसका कारक चिह्न "से"  के "द्वारा" है.
जैसे :-
राजा ने दुस्ट को बाण से मारा.
ऊपर के वाक्य में कर्ता राजा ने मारने का कार्य "बाण" से किया. इसलिए "बाण से" करण कारक है.
राजू गेंद से खेल रहे हैं.

ऊपर के वाक्य में कर्ता राजू खेलने का कार्य "गेंद" से कर रहे हैं. इसलिए "गेंद से" करण कारक है.
संप्रदान कारक
संप्रदान का अर्थ है :- देना
अर्थात की कर्ता जिसके लिए कुछ कार्य करता है, या जिसे कुछ देता है. संप्रदान कारक कहलाता हैं. संप्रदान कारक का चिह्न "के लिए" को हैं.
जैसे :-
अपनों के लिए वह कार्य कर रहा है .
ऊपर के वाक्य में "अपनों के लिए" संप्रदान कारक हैं.

अपादान कारक
जब वाक्य की किसी संज्ञा के क्रिया के द्वारा अलग होने , तुलना होने अथवा दूरी होने का भाव प्रकट होता है. वहां अपादान कारक होता है. अपादान कारक का चिह्न "से" है.
जैसे :- सायकिल से बालक गिरा.
इस वाक्य में सायकिल से बालक का गिरना ये बताता है. कि सायकिल से बालक अलग हुआ (कुछ दूर हुआ) है .
अर्थात ऊपर के वाक्य में सायकिल से अपादान कारक है.

संबंध कारक
शब्द के जिस रूप से किसी एक वस्तु का दूसरी वस्तु से संबंध प्रकट हो. उस संबंध कारक कहते हैं.संबंध कारक का चिह्न (का, के, की, रा, रे, री) है.
जैसे :-
यह शंकर का बेटा है
इस वाक्य में "शंकर का बेटा" से संबंध प्रकट हो रहा है. इसलिए यहाँ संबंध कारक है.

अधिकरण कारक
शब्द के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध होता है वह अधिकरण कारक कहलाता हैं. अधिकरण कारक का चिह्न "में" , "पर" हैं.
जैसे:
बॉक्स में मोबाइल रखा है.
"बॉक्स में" रखने की क्रिया के आधार का पता चलता है. बॉक्स में अधिकरण कारक है.

संबोधन कारक
जिससे किसी को बुलाने या सचेत करने का भाव प्रकट हो. वह संबोधन कारक कहलाता है.इसमें संबोधन चिह्न ( ! ) लगाया जाता है.

जैसे:
अरे भैया ! क्यों रो रहे हो?
हे गोपाल! यहाँ आओ.





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3 Comments

  1. Sangya kise kahate hain के बारे में बताया अच्छा की संज्ञा किसे कहते हैं इसके भेद ओर प्रकार को विस्तार्स समझाया और संज्ञा की परिभाषा भी अच्छी लगी।

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  2. बहुत अच्छी जानकारी दी "संज्ञा किसे कहते हैं" से संबंधित और आपको what is noun in hindi का प्रचार प्रसार sangya kise kahate hain के लेख में मिला है।

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  3. संज्ञा किसे कहते हैं संज्ञा के भेद उदाहरण सहित के बारे में अच्छा बताया जिसमें sangya kise kahate hain sangya ke bhed kitne prakar ke hote hai apne achha bataya sike liye tha post bahut achhi likhi hai

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