भारत में फसल के प्रकार | वर्गीकरण | ख‍रीफ, रबी और जायद फसलों के नाम – Kharif Rabi Fasal Crops Prakar

भारत में फसल के प्रकार और वर्गीकरण | ख‍रीफ, रबी और जायद फसलों के नाम | kharif rabi fasal crops prakar 

लेख के अनुक्रम📃
                 👉ख‍रीफ फसलें
                 👉रबी फसलें
                 👉जायद फसलें
                 👉एकवर्षीय फसलें
                 👉द्विवर्षीय फसलें
                 👉बहुवर्षीय फसलें
                 👉अन्‍न या धान्‍य फसलें
                 👉दलहनी फसलें
                 👉तिलहनी फसलें
                 👉मसाले वाली फसलें
                 👉फलदार फसलें
                 👉औषधीय फसलें
                 👉रेशेदार फसलें
                 👉चारा फसलें
                 👉जड एवं कन्‍द वाली फसलें
                 👉उद्दीपक
                 👉शर्करा
                 👉अन्‍तर्वती फसले
                 👉नकदी फसलें
                 👉हरी खाद
                 👉मृदा रक्षक फसलें
                 👉ख‍रीफ फसलें
                 👉रबी फसलें
                 👉जायद फसलें
भारत में फसल के प्रकार और वर्गीकरण | ख‍रीफ, रबी और जायद फसलों के नाम | kharif rabi fasal crops prakar

फसल किसे कहते हैं (What Is Crop In Hindi)

किसी समयचक्र के तहत वनस्पतियों अथवा वृक्षों पर मानवों और पालतू पशुओं के उपभोग हेतु उगाकर काटी अथवा तोड़ी जाने वाली पैदावार को फसल कहते हैं। 


जिस भी काल से कृषि का आविष्कार हुआ तभी से यह मानवों के जीवनक्रम में फ़सलों का बड़ा अहम महत्व रहा है। 


भारत में फसलों के प्रकार या वर्गीकरण | Types or Classification of Crops in India in hindi

भारतीय फसलें तथा उनका वर्गीकरण हम आपको नीचे क्रमिक रूप से लिस्ट बता रहे है उन्हें सभी के नाम शामिल है प्रकार के साथ


भारतीय फसलों का वर्गीकरण भिन्न-भिन्न आधारों पर किया जा सकता है। जिनमे से कुछ नीचे आधारों पर भारतीय फसलों का वर्गीकरण: 

1] ऋतु या मौसम आधारित

2] जीवन-चक्र के तहत

3] आर्थिक उपयोगिता आधारित

4] विशेष उपयोग के तहत


1] ऋतु आधारित

ख‍रीफ फसलें- कपास (Cotton), सोयाबीन, मूँगफली, शकरकन्‍द, धान, बाजरा, मक्‍का(Corn), उर्द, मोठ लोबिया (चँवला), ज्‍वार, सनई, अरहर, ढैंचा, गन्‍ना, भिण्डी(Lady finger), तिल, ज्वार, जूट इत्यादि।

 

रबी फसलें- गेहूँ(wheat), चना, मटर, सरसों, बरसीम, रिजका, मसूर, जौं, आलू(potato), राई, तम्‍बाकू, लाही, जंई


जायद फसलें- मूँग, खीरा, मीर्च(Mirch), टमाटर(tomatoes), कद्दू, खरबूजा, तरबूज(watermelon), लौकी, तोरई, सूरजमूखी


2] जीवनचक्र पर आधारित

एकवर्षीय फसलें- कपास(Cotton), मूँगफली, सरसों, आलू, धान, गेहूँ, चना(gram), ढैंचा, बाजरा, मूँग, शकरकन्‍द, कद्दू, लौकी, सोयाबीन इत्यादि।


द्विवर्षीय फसलें- प्‍याज(onion), चुक्कन्‍दर।


बहुवर्षीय फसलें- फलवाली फसलें, नेपियर घास, रिजका।



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3] उपयोगिता या आर्थिक आधार पर

अन्‍न या धान्‍य फसलें- मक्‍का(Corn), ज्‍वार, बाजरा, धान, गेहूँ(wheat), जौं, चना।


दलहनी फसलें- मूँगफली(Peanuts), सोयाबीन(Soybean), चना, उर्द, मूँग, मसूर, अरहर, मटर(peas)।


तिलहनी फसलें- अलसी(Linseed), तोरिया, सोयाबीन(Soybean), सरसों, अरंडी, तिल, मूँगफली, सूरजमूखी(Sun oriented) और राई


मसाले वाली फसलें- हल्‍दी, कालीमिर्च, इलायची, तेजपात, अदरक(Ginger), पुदीना, प्‍याज(onion), लहसुन, अजवाइन, जीरा, सौफ, मिर्च, धनिया। 


फलदार फसलें- आम(Mango), अमरूद, केला, पपीता(papaya), सेब, नींबू(Lemon), लिचि, नाशपाती


औषधीय फसले- हल्‍दी(turmeric), तुलसी, पोदीना, मेंथा, अदरक। 


रेशेदार फसलें- पटसन, जूट(jute), कपास, सनई, ढैंचा


चारा फसलें- नैपियर घास, लोबिया, ज्‍वार, बरसीम, लूसर्न (रिजका)।


जड एवं कन्‍द- अदरक, गाजर, मूली, आलू, शकरकन्‍द(Sweet potato), अरबी, रतालू, टेपियोका, शलजम


उद्दीपक- धतूरा, भांग, तम्बाकू(Tobacco), पोस्‍त, चाय(Tea), कॉफी।


शर्करा- गन्‍ना, चुकन्‍दर


4] विशेष उपयोग आधारित

अन्‍तर्वती फसले- आलू, उर्द, लाही, सांवा, मूँग, चीना।


नकदी फसलें- कपास, मिर्च, चाय(Tea), काफी, गन्‍ना, आलू(potato), तम्‍बाकू।


हरी खाद- मसूर, ज्वार, मक्‍का(Corn), मूँग, सनई, बरसीम, ढैचां, मोठ, लोबिया।


मृदा रक्षक फसलें- मूँगफली, बरसीम, लूसर्न (रिजका), मूँग, उर्द, शकरकन्‍द।


कौनसी फसल कब बोई और काटी जाती है?

खरीफ रबी और जायद फसलों को कब बोते और काटते है नीचे क्रम से दिया गया है:


ख‍रीफ फसलें-

भारतीय उप-महाद्वीप में खरीफ की फसल उन फसलों को कहते हैं? जिन्हें जून-जुलाई में बोते हैं, और अक्टूबर के आसपास काटते हैं। इन फसलों को बोते समय अधिक तापमान एवं आर्द्रता तथा पकते टाइम शुष्क वातावरण की जरूरत होती है।


रबी फसलें-

रबी की फसल उत्तर भारत में अक्टूबर-नवंबर माह के दौरान बोई जाती है, जो कम तापमान में बोई जाती है, फसल की कटाई फरवरी-मार्च महीने के बीच की जाती है।


जायद फसलें-

इस वर्ग की फसलों में तेज गर्मी और शुष्क हवाएँ सहन करने की अच्छी अच्छी क्षमता होती हैं। उत्तर-भारत में ये फसलें मूख्यतः मार्च-अप्रैल में बोई जाती हैं।


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