रेखाचित्र और संस्मरण किसे कहते है? में अंतर बताइए क्या है

रेखाचित्र और संस्मरण किसे कहते है? में अंतर बताइए क्या है
Rekhachitr aur sansmaran me antar: आज का यह लेख मुख्य रूप से रेखाचित्र और संस्मरण से संबंधित लेख लेकर आया जिसमें इन दोनों को क्या है? किसे कहते हैं? में अंतर बताइए. की सभी जानकारी सम्मिलित है।   


रेखाचित्र किसे कहते हैं? क्या है?
रेखाचित्र अथवा आरेखण (ड्राइंग) एक दृश्य कला है, जो द्वि आयामी साधन को चिह्नित करने के लिए किसी भी प्रकार के रेखाचित्र उपकरणों का प्रयोग करता है। आम उपकरणों में शामिल है, ग्रेफाइट पेंसिल, कलम और स्याही , स्याहीदार ब्रश , मोम की रंगीन पेंसिल , क्रेयोन , चारकोल , खड़िया, पैस्टल, मार्कर, स्टाइलस, अथवा विभिन्न धातु सिल्वरपॉइंट । एक रेखाचित्र पर काम करने वाले कला-कार को नक्शानवीस अथवा प्रारूपकार के रूप में उद्धृत किया जा सकता हैं।

इसको अंग्रेजी भाषा में स्कैच कहते हैं। जैसे हम किसी व्यक्ति अथवा किसी वस्तु का चित्र बनाते है, रेखाओं द्वारा उसी तरह शब्द रेखाओं का प्रयोग कर के यदि किसी व्यक्ति, उसके स्वाभाव एवं उसके व्यक्तित्व को शब्दों द्वारा चित्रित करते है। जिसे लोग एक कहानी अथवा कविता के रूप में आसानी से पढ़ के हमारे दिमाग में बनी स्मृति का पता लगा सकते हैं। इस प्रकार के लेखन में वो कहानी होती है, जिससे की लेखक किसी व्यक्ति से प्रभावित होकर उस विषय में वर्णन कर सकें।  



संस्मरण किसे कहते हैं? क्या है?
स्मृति के आधार पर किसी विषय पर अथवा किसी व्यक्ति पर लिखित आलेख को संस्मरण  कहते हैं। यात्रा साहित्य भी इसके अन्तर्गत आता है। संस्मरण को साहित्यिक निबन्ध की एक प्रवृत्ति भी माना जा सकता है। ऐसी रचनाओं को संस्मरणात्मक निबंध कहा जा सकता है। 

व्यापक रूप से संस्मरण आत्मचरित के अन्तर्गत लिया जा सकता है। किन्तु संस्मरण और आत्मचरित के दृष्टिकोण में मौलिक भिन्नता है। आत्मचरित के लेखक का मुख्य उद्देश्य अपनी जीवनकथा का वर्णन करना होता है। इसमें कथा का प्रमुख पात्र स्वयं लेखक होता है। यह लेखक का दृष्टिकोण भिन्न रहता है।

 संस्मरण में लेखक जो कुछ स्वयं देखता है और स्वयं अनुभव करता है उसी का चित्रण करता है। लेखक की स्वयं की अनुभूतियाँ एवं संवेदनायें संस्मरण में अन्तर्निहित रहती हैं। इस दृष्टि से संस्मरण का लेखक निबन्धकार के अधिक निकट है। वह अपने चारों ओर के जीवन का वर्णन करता है। इतिहासकार के समान वह केवल यथातथ्य विवरण प्रस्तुत नहीं करता है। पाश्चात्य साहित्य में साहित्यकारों के अतिरिक्त अनेक राजनेताओं तथा सेनानायकों ने भी अपने संस्मरण लिखे हैं, जिनका साहित्यिक महत्त्व स्वीकारा गया है।  

कुछ स्मृतियों के आधार पर लिखे आलेख, उपन्यास, कविता जिसमें किसी व्यक्ति अथवा उसके विषय में अथवा किसी अन्य विषय में वर्णन किया गया हो, उसे संस्मरण कहते हैं।

संस्मरण में कई प्रकार के वर्णन हो सकते हैं जैसे कोई व्यक्ति जो पुराने समय में बहुत प्रशिद्ध हो, उसके ऊपर लिखा गया आलेख, यात्रा में घटित कोई कहानी, जो प्रशिद्ध हो, अथवा किसी के व्यक्तित्व के बारे में, जो व्यक्ति बहुत प्रशिद्ध रहा हो, उनको संस्मरण कहते हैं।



रेखाचित्र और संस्मरण में अंतर क्या है? बताइए

रेखाचित्र और संस्मरण किसे कहते है? में अंतर बताइए क्या है

1] रेखाचित्र में आत्मपरकता नहीं होती है इसमें कुछ बची हुई स्मृतियाँ हमारे दिल दिमाग में रेखा के रूप में बन जाती है, उस रेखाचित्र कहते हैं। संस्मरण में आत्मपरकता होती है ये हमारी पुरानी यादें होती हैं, जो अचानक से याद आ जाती है।


2] रेखाचित्र में कल्पना का समावेश हो सकता है, ये चीज जरूरी नहीं की जिसके विषय में आप लिख रहे हैं। वो व्यक्ति वास्तविकता में हो किन्तु संस्मरण में व्यक्ति का कभी न कभी होना अनिवार्य है यानी कि इसमें तटस्थता होना अनिवार्य है।


3] रेखाचित्र किसी भी कॉल हो सकता है, इसमें ये आवश्यक नहीं कि ये भूतकाल का ही हो ये आपका वर्तमान का भी हो सकता है। किन्तु संस्मरण हमारा अतीत का ही होता है यानी भूतकाल का ही होता है।


4] रेखाचित्र में हम सामान्य व्यक्ति के बारे में बताते हैं किंतु संस्मरण हमेशा किसी प्रसिद्ध व्यक्ति का ही होता है। जिसके बारे में लेखक के जीवन में कहीं न कहीं बहुत महत्व होगा।

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